तुर्की ने भारत आ रहे मालवाहक विमान को रोका, एयरक्राफ्ट में था तीन AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों

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नई दिल्ली/अंकारा : भारतीय सेना को तुर्की के करण AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों के दूसरे और अंतिम बैच की डिलीवरी में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दरअसल, तुर्की ने भारत को अपाचे हेलीकॉप्टरों को ले जा रहे ट्रांसपोर्ट विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने से मना कर दिया। इस कारण ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को अचानक वापस लौटना पड़ा और विमान को दोबारा हैंगर में खड़ा किया गया है। इससे पहले से ही डिलीवरी में देरी का सामना कर रही भारतीय सेना का इंतजार और ज्यादा बढ़ गया है।

हेलीकॉप्टरों को वापस अमेरिका लाया गया : प्लेन स्पॉर्टर @KiwaSpotter के अनुसार, 30 अक्टूबर को भारी मालवाहक विमान, An-124 सीरियल नंबर UR-82008, जर्मनी के लीपजिग स्थित अपने संचालन केंद्र से उड़ान भरकर एरिजोना के मेसा गेटवे हवाई अड्डे (फीनिक्स-मेसा हवाई अड्डा) पर पहुंचा। इस एयरबेस पर विमान में तीन अपाचे हेलीकॉप्टरों को लोड किया गया, जो खास तौर पर भारतीय सेना के रंग में रंगे हुए थे। तस्वीरों में भी अपाचे को An-124 पर लादते हुए दिखाया गया है।

इंग्लैंड से 8 दिन बाद वापस लौटा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट : इसके बाद, विमान ने 1 नवंबर को मेसा गेटवे हवाई अड्डे से उड़ान भरी और इंग्लैंड के ईस्ट मिडलैंड्स हवाई अड्डे पर उतरा, जहां यह 8 दिनों तक जमीन पर ही रहा। 8 नवंबर को, भारत की अपनी आगे की यात्रा जारी रखने के बजाय, An-124 विमान अपने लोड के साथ मेसा गेटवे हवाई अड्डे पर वापस लौट गया। यहां पहुंचने पर अपाचे विमानों को An-124 से उतार लिया गया और अमेरिकी हवाई अड्डे पर F-250 ट्रकों से टो करके ले जाया गया।

तुर्की ने अपाचे ले जा रहे विमान को वापस लौटाया : यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग के एक प्रवक्ता के हवाले से कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यह घटना अज्ञात “लॉजिस्टिक समस्याओं” के कारण हुई है। रिपोर्ट में एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले से बताया गया कि An-124 विमान अमेरिका लौटने से पहले एक हफ़्ते तक इंग्लैंड में फंसा रहा क्योंकि तुर्की ने AH-64E ले जा रहे मालवाहक विमान के लिए हवाई क्षेत्र की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। जब इस सूत्र से तुर्की से मंजूरी रोके जाने के कारणों के बारे में और पूछा गया, तो उन्होंने “भारत और तुर्की के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति” का हवाला दिया।

भारत-तुर्की संबंध निचले स्तर पर : मई 2025 में हुए चार दिवसीय युद्ध के दौरान अंकारा द्वारा पाकिस्तान के साथ खुलेआम गठबंधन करने के बाद भारत-तुर्की संबंध एक नए निम्न स्तर पर पहुंच गए हैं। तुर्की ने न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के हमलों की सार्वजनिक रूप से निंदा की, बल्कि उसने इस्लामाबाद को दर्जनों ड्रोन सहित सैन्य सहायता भी प्रदान की।

पाकिस्तान का दोस्त है तुर्की : तुर्की और पाकिस्तान घनिष्ठ सहयोगी हैं। तुर्की पारंपरिक रूप से पाकिस्तान को राजनयिक समर्थन देता रहा है। उदाहरण के लिए, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने 2019 से अपने भाषणों में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कश्मीर का बार-बार जिक्र किया है और इसे “शांति के लिए खतरा” बताया है। इस कदम को भारत ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना है। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की का पाकिस्तान को समर्थन करना भारत-तुर्की संबंधों में बची-खुची कसर को खत्म करने वाला साबित हुआ है।

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