यूनेस्को के 20वें सत्र में कई प्रस्तावों को मिली मंजूरी, तंगेल साड़ी बुनाई-बोरींडों वाद्ययंत्र को मिली जगह

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नई दिल्ली : यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में मंगलवार को बांग्लादेश के तंगेल की पारंपरिक साड़ी बुनाई कला, अफगानिस्तान की बहजाद की लघु चित्रकला शैली समेत कई अरब देशों (कतर, बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान,सऊदी अरब,सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात) द्वारा नामांकित ‘’बिष्ट’’ (पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला गाउन) यानी अबा को बुनने की कला और परंपरा को अर्मूत सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया है। दिल्ली के लाल किला में आयोजित यूनेस्को के 20वें सत्र के दूसरे दिन इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

वेनेजुएला की जीवंत उत्सव परंपरा जोरोपो, बोलीविया के ग्वाडालूप की वर्जिन का उत्सव प्रोटनेस ऑफ शुक्रे, पाकिस्तान के सिंध प्रांत का प्राचीन लोक संगीत वाद्ययंत्र बोरींडो और उसकी धुनें, पैराग्वे की प्राचीन चीनी मिट्टी की शिल्पकला, केन्या के दाईदा समुदाय के म्वाजिंडिका आध्यात्मिक नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (आईसीएच) में शामिल किया। उक्त सभी को तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। अफगानिस्तान की ‘’बहज़ाद की लघु चित्रकला शैली’’ का नाम 15वीं शताब्दी के उस कलाकार के नाम पर रखा गया है, जिनकी तकनीकी, परिप्रेक्ष्य और रंगों के प्रयोग ने उन्हें अपने समय के सबसे प्रसिद्ध चित्रकारों में से एक बना दिया था।

यूनेस्को ने बेल्जियम से नामांकित ब्रुसेल्स की रॉड मैरियोनेट परंपरा,बुल्गारिया के बैगपाइप बनाने और बजाने की कला के अलावा जिबूती, कोमोरोस, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, जॉर्डन और सोमालिया की पारंपरिक जफा विवाह परंपरा को भी सांस्कृतिक विरासत माना है। समिति यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल करने के लिए 80 देशों द्वारा प्राप्त ‘’कुल 67 नामांकनों’’ पर विचार करेगी।

भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला समेत आधुनिक भारत की झलक दिखी : केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर सरकारी समिति के 20 वें सत्र की बैठक से पहले ही, विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास और समकालीन भारत से रूबरू कराने के लिए विशेष रूप से बैरक में चार दीर्घा तैयार की थीं। इसी के तहत, लाल किला परिसर में ब्रिटिश कालीन बैरक के सामने 70-80 के दशक में एयर इंडिया के बोईंग -747 विमान का मॉडल बाहर रखा है। इसी मॉडल को मुगल जोराखा शैली में डिजाइन के कारण ‘’उड़ता महल’’ (फ्लाइंग पैलेस) के नाम से फेमस और शाहजहां का नाम से पुकारा जाता था।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया, मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा 1648 में निर्मित ऐतिहासिक लाल किले से दुनिया को चोल, शाहजहां, मुगल कला, कलमकारी से लेकर समकालीन भारत से रूबरू कराना है। लाल किले के अंदर बैरक में चार दीर्घा तैयार की गई हैं। इसमें भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला समेत आधुनिक भारत की झलक दिखाई गई है। दो दीर्घा में एयर इंडिया से मिला महाराज संग्रह, तीसरी में हथियारों और शस्त्रागारों और चौथी दीर्घा में लाल किला परिसर में खुदाई और यहां के पुरातात्विक वस्तुओं को रखा गया है। इसी के तहत ब्रिटिश कालीन बैरक के सामने, एयर इंडिया का पुराना प्रसिद्ध मॉडल लगाया गया है।

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