PM मोदी के चीन दौरे के बाद EU ने भारत से मांगी मदद, यूक्रेन युद्ध प्रकरण में रूस को मनाने के लिए कहा

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को चीन में आयोजित एससीओ समिट में हिस्सा लिया, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से हुई. तीनों नेताओं की इस अहम मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहीं. अब करीब 120 घंटे बाद यूरोपीय संघ (EU) ने भारत से कॉन्टैक्ट कर यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद मांगी और रूस को मनाने के लिए कहा. इस पर पीएम मोदी ने जवाब देते हुए कहा कि भारत हमेशा संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा.

पीएम मोदी और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच फोन पर ये बातचीत हुई. इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया. वॉन डेर लेयेन और करीब पूरे ईयू कमीशन ने इस साल भारत का दौरा किया था, जहां साल के आखिर तक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने का टारगेट तय किया गया था. कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘रूस को युद्ध खत्म करने और शांति की दिशा में रास्ता बनाने में भारत की अहम भूमिका है.’ उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ भारत की लगातार बातचीत का भी स्वागत किया.

विदेश मंत्रालय ने कहा : इस बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर बात हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत हमेशा संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति व स्थिरता की बहाली का समर्थन करता है. वहीं, कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पूरी दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है. भारतीय बयान में यह भी बताया गया कि नेताओं ने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की अहमियत पर जोर दिया, ताकि मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान किया जा सके.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी गुरुवार को अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्रेई सिबिहा से बात की और सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत चाहता है यह युद्ध जल्द खत्म हो और स्थायी शांति कायम हो.

‘समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत से ही निकल सकता है’ : हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पीएम मोदी को फोन कर युद्ध खत्म करने की कोशिशों पर बात की थी. यह मुद्दा इस हफ्ते चीन में हुए एससीओ समिट के दौरान भी उठा, जब मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई. भारत रूस और यूक्रेन के बीच सीधे बातचीत की अपील करता रहा है. पीएम मोदी ने पुतिन और जेलेंस्की दोनों को यह बात कही है कि समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत से ही निकल सकता है.

यूरोपीय संघ की बैठक : फोन पर यह बातचीत यूरोपीय संघ (EU) के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की कोपेनहेगन में होने वाली बैठक से दो दिन पहले हुई. इस बैठक में ‘एंटी-सर्कमवेंशन टूल’ पर चर्चा हो सकती है, जिसके तहत उन देशों पर सेकेंडरी सैंक्शन (पाबंदी) लगाए जा सकते हैं, जो रूस को पश्चिमी पाबंदियों वाले सामान और जरूरी चीजें हासिल करने में मदद करते हैं.

ट्रंप का टैरिफ वॉर : वहीं, अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर पहले से लगे टैरिफ को दोगुना करने के लिए 25% अतिरिक्त शुल्क भी लगा दिया है. जबकि, भारत ने रूस से तेल खरीदने का बचाव करते हुए कहा है कि यह उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है. फिलहाल भारत की करीब 40% ऊर्जा जरूरतें रूस पूरी करता है. भारत बयान के मुताबिक, नेताओं ने व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में प्रगति का स्वागत किया और भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जल्द पूरा करने के संकल्प को दोहराया. साथ ही IMEEC (इंडिया–मिडल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) को लागू करने पर भी सहमति जताई.

भारत-ईयू समिट आयोजित करने पर हुई चर्चा : कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हम साल के अंत तक FTA को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और अब तेजी से प्रगति की जरूरत है. अब तक इस समझौते पर 12 दौर की बातचीत हो चुकी है. दोनों पक्षों ने जल्द भारत में अगला भारत-ईयू समिट आयोजित करने पर भी चर्चा की. मोदी ने दोनों नेताओं को इस बैठक के लिए आमंत्रित किया.साथ ही, समिट में साझा रणनीतिक एजेंडा तय करने पर सहमति बनी.

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