PoJK : पाक अधिकृत कश्मीर में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तीन की मौत और 22 लोग घायल

नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में सोमवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए जब क्षेत्र की पुलिस भी पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उत्तर आई। अवामी एक्शन कमेटी पहले से क्षेत्रीय समस्याओं के खिलाफ शहबाज सरकार के विरोध में धरने-प्रदर्शन करती आ रही है। सोमवार को स्थानीय पुलिसकर्मियों में भी पाकिस्तान की सरकार के प्रति नाराजगी देखने को मिली। हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हो गए।

स्थानीय पुलिसकर्मियों ने मांगे पूरी न होने पर पूरे पीओजेके में बंद किया। हालात नियंत्रित करने के लिए सरकार ने भारी संख्या में सुरक्षा बल को प्रांत में तैनात कर दिया। इनमें 7,000 सुरक्षाबल और फ्रंटियर फोर्स के सैनिकों को तैनाती मिली। स्थानीय पुलिसकर्मियों ने पाकिस्तानी सरकार के सामने 11 सूत्रीय मांगें रखीं थीं, जिनमें वेतन वृद्धि से लेकर जोखिम भत्ता, आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ देने के प्रावधान शामिल थे।

कई घंटे की बैठक के बाद वार्ता हुई नाकाम : अवामी एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने कहा, हमारा अभियान किसी संस्था के खिलाफ नहीं है। लेकिन, पिछले 70 वर्षों से पीओजेके के लोगों को मौलिक अधिकार नहीं मिले हैं। बस अब बहुत हो गया। या तो हमें हमारे अधिकार दो और या फिर लोगों के गुस्से का सामना करें। पाकिस्तान सरकार कमेटी से बातचीत भी कर रही है। हालांकि 13 घंटे तक चली बैठक के बाद यह बार्ता नाकाम हो गई।

जनजीवन ठप : पीओजेके में सोमवार को पूर्ण हड़ताल हुई। बाजार, दुकानें और व्यावसायिक केंद्र बंद रहे। कश्मीरी आबादी द्वारा सभी व्यावसायिक गतिविधियों को रोककर संयुक्त कार्रवाई समिति के प्रति मजबूत समर्थन जताने के कारण पूरे क्षेत्र को सड़कें और गलियां वीरान रहीं। सोमवार को पीओजेके में जनजीवन ठप रहा।

इंटरनेट ब्लैकआउट पर अंतरराष्ट्रीय दखल का आग्रह : यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पीओजेके में इंटरनेट व फोन सेवाएं बंद करने के बाद अंतरराष्ट्रीय अपील जारी की है। संगठन ने कहा, यह संचार ब्लैकआउट पाकिस्तानी अफसरों के शांतिपूर्ण असहमति को दबाने और बढ़ती अशांति में क्षेत्र को वैश्विक समुदाय से अलग-थलग करने की जानबूझकर की गई एक चाल है। प्रदर्शनकारी यहां बुनियादी अधिकारों व आर्थिक न्याय की मांग कर रहे हैं।

पीओजेके में पाकिस्तान पर दशकों से लोगों के राजनीतिक दमन के आरोप लगे हैं, जिनके विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। यूकेपीएनपी ने चेताया कि पाकिस्तान ने पूरे क्षेत्र में अर्धसैनिक रेंजर्स और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया है, जिससे हिंसा संभव है। अपील में संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटेन, अमेरिका, ईयू, चीन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड से आगे की हिंसा को रोकने के लिए दखल करने का आह्वान किया गया।

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