दशहरा@2025 : देशभर में धूमधाम और उत्साह से मनाया गया नवरात्र-विजयदशमी, बारिश ने डाला खलल

नई दिल्ली : देशभर में गुरुवार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय नवरात्र उत्सव का समापन हो गया और लोग रावण के पुतलों का दहन देखने के लिए रामलीला मैदानों में उमड़ पड़े। हालांकि, शाम को दिल्ली समेत कुछ स्थानों पर बारिश ने खलल डाल दिया। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा समेत अन्य पूर्वी राज्यों में विजयदशमी का त्योहार और ‘सिंदूर खेला’ एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। रावण के अलावा, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाथ के पुतले भी खुले मैदान में दहन किये गए। मैसूर में 11 दिवसीय दशहरा उत्सव और पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का भी समापन हो गया।

कई जगहों पर बारिश से रावण के पुतले भीग गए और इस वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को इंद्रप्रस्थ रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित ‘रावण दहन’ कार्यक्रम में शामिल होना था, जिसे अचानक भारी बारिश के कारण रद्द कर दिया गया, जबकि अमित शाह बारिश के कारण पीतमपुरा में एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

मध्य प्रदेश में दो दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्राओं के दौरान हादसा हुआ जिसमें दो बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई। खंडवा जिले के पंधाना इलाके में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के झील में गिर जाने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। ट्रॉली पर दुर्गा प्रतिमाएं रखी हुई थीं। उज्जैन जिले के नरसिंह गांव के पास 12 लोगों और दुर्गा प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के चंबल नदी में गिर जाने से 8 और 16 वर्षीय दो लड़कों की मौत हो गई, जबकि एक लड़का लापता हो गया।

दिल्ली में बारिश के बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लाल किले पर दशहरा समारोह में शामिल हुईं और माधवदास पार्क में “रावण दहन” के दौरान प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाया। बारिश के बीच कई लोगों ने छाते लेकर यह कार्यक्रम देखा। मुर्मू ने कहा कि यह त्योहार हमेशा से बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर विनम्रता और घृणा पर प्रेम की विजय का प्रतीक रहा है। उन्होंने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की भी सराहना की और कहा कि यह आतंकवाद के रावण पर एक विजय है। उन्होंने मानवता की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों को सलामी दी।

मोदी पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज में दशहरा समारोह में शामिल होने वाले थे, लेकिन बारिश के कारण वे इसमें शामिल नहीं हो सके। इंद्रप्रस्थ रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुरेश बिंदल ने बताया कि बारिश के कारण पुतले क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन बाद में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, विधायक अरविंदर सिंह लवली और अन्य की उपस्थिति में उनका दहन किया गया। इससे पहले, मोदी ने लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “विजयादशमी बुराई और असत्य पर अच्छाई और सत्य की विजय का प्रतीक है। मेरी कामना है कि इस पावन अवसर पर हर किसी को साहस, बुद्धि और भक्ति के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा मिले। देशभर के मेरे परिवारजनों को विजयदशमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”

पीतमपुरा के आर्यन हेरिटेज फाउंडेशन के अनिल गर्ग ने बताया, ‘‘पुतले का 10 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा भीग गया था क्योंकि हमने बाकी हिस्से को प्लास्टिक से ढक दिया था। पूजा में देरी हुई। जलभराव की समस्या भी थी। लेकिन सब कुछ भगवान की इच्छा से होता है।’’ पूर्वी दिल्ली स्थित हनुमंत धार्मिक रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा, ‘‘बारिश हमारे लिए बहुत बड़ा झटका थी, जिससे हमारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। पुतले का एक बड़ा हिस्सा भीग गया, लेकिन बाकी हिस्से को हमने प्लास्टिक की चादरों से ढककर किसी तरह बचा लिया।

रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ में भी पारंपरिक अनुष्ठान किए गए। विसर्जन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग नदियों और जलाशयों के किनारे एकत्रित हुए। पुलिस ने कहा कि उन्होंने मूर्तियों के विसर्जन के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की थी। हालांकि, कोलकाता में कई सामुदायिक पूजा समारोहों की मूर्तियों का विसर्जन नहीं हो सका, क्योंकि आज बृहस्पतिवार था, जिसे इस अनुष्ठान के लिए ‘‘अशुभ’’ माना जाता है। इन पूजा समारोहों के आयोजकों ने शुक्रवार को विसर्जन करने की योजना बनाई है।

देश भर के साथ-साथ श्रीनगर में भी दशहरा मनाया गया। 1990 के बाद पहली बार, दिल्ली, मुंबई और देश भर के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित विजयादशमी मनाने के लिए कश्मीर पहुंचे। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह उत्सव शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में मनाया गया, जहां रावण दहन की रस्म के तहत रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के 50 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया। सुरक्षाकर्मियों सहित हजारों लोगों ने भगवान राम के जयकारों और पारंपरिक संगीत के साथ इस उत्सव में भाग लिया।

जलते हुए पुतलों ने शाम के आसमान को रोशन कर दिया, जिससे 5,000 से ज़्यादा लोगों की भीड़ ने जयकारे लगाए, जो दशकों में सबसे बड़ी भीड़ थी। कश्मीरी पंडितों ने कहा, “कश्मीर में दशहरा हमारे दिलों में एक विशेष स्थान रखता है। यह हमें एक समुदाय के रूप में एकजुट करता है और हमारी विरासत के साथ हमारे बंधन को मजबूत करता है। घाटी में दशहरा मनाना हमें अपनी जड़ों और साझा परंपराओं की याद दिलाता है। यह सिर्फ़ एक त्यौहार नहीं है। यह हम सभी के लिए एकता और आशा का क्षण है।”

कर्नाटक के मैसूर शहर में 11 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध दशहरा उत्सव का विजयादशमी के भव्य शोभायात्रा के साथ समापन हो गया। ‘नाडा हब्बा’ (राज्य उत्सव) के रूप में मनाया जाने वाला मैसूर दशहरा या ‘शरणा नवरात्रि’ उत्सव इस साल कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को शाही धूमधाम और गौरव के साथ प्रदर्शित करने का मंच बना। हजारों लोग ‘जंबू सवारी’ देखने के लिए जुटे। ‘अभिमन्यु’ नाम के हाथी के नेतृत्व में एक दर्जन सजे-धजे हाथियों की शोभायात्रा निकली।

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