रांची/पटना : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने केवल दो सीटें दिए जाने पर तीखा एतराज जताया है। पार्टी ने साफ कहा है कि यदि उसे सम्मानजनक सीटें नहीं दी गईं, तो वह 12 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।
जेएमएम ने महागठबंधन पर जताई नाराजगी : शनिवार को रांची स्थित जेएमएम केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन के घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा को कमजोर न समझें। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया है। झारखंड में 2019 के विधानसभा चुनाव में हमने राजद को सात सीटें दी थीं, जिनमें से उसने चतरा सीट जीती। इसके बाद भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजद के उस एकमात्र विधायक को पूरे पांच साल मंत्रिमंडल में स्थान दिया।
भट्टाचार्य ने कहा कि अब जब बिहार चुनाव का समय आया है, तो राजद की ओर से जेएमएम को केवल दो सीटें देने का प्रस्ताव किया गया है, जो अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सहयोगियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जीत केवल सीटों से नहीं, एकजुटता और सम्मान से आती है।
‘जरूरत पड़ी तो 12 सीटों पर लड़ेंगे’ : भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी ने बिहार के 12 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी तैयारी पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि जब हमने राजद को छह सीटें दी थीं तो अब हमारी बारी है, हमें भी 12 सीटें मिलनी चाहिए। हमने उन्हें परोसकर दिया था, अब बारी है कि वे भी उसी आदर से परोसें।
उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बिना महागठबंधन की जीत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने आगे जोड़ा कि हमको भी फॉर्म-1 और फॉर्म-2 भरना आता है। जरूरत पड़ी तो बिहार में भी इसे दोहराने की स्थिति में रहेंगे।
‘सम्मानजनक समझौते के बिना नहीं झुकेगा जेएमएम’ : भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पार्टी महागठबंधन में किसी तरह का भ्रम या दरार नहीं चाहती, लेकिन सम्मान और साझेदारी के साथ समझौता न होने पर जेएमएम अपने दम पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी बिहार और झारखंड दोनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों को चुनौती के रूप में देख रही है।
