नई दिल्ली/जकार्ता : इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में पिछले हफ्ते एक स्कूल की मस्जिद में हुए धमाके के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने बताया कि 17 साल का छात्र, जिसने हमला किया था, ऑनलाइन चरमपंथी विचारों से प्रभावित था लेकिन उसका किसी आतंकी संगठन से कोई सीधा संबंध नहीं था। पुलिस के मुताबिक, यह छात्र अकेला रहता था और हिंसक व उग्रवादी वीडियो और कंटेंट देखने का आदी था। शुक्रवार को हुए इस धमाके में 96 लोग घायल हुए थे, जिनमें से खुद छात्र भी घायल हुआ और फिलहाल दो ऑपरेशन के बाद अस्पताल में भर्ती है।
जकार्ता पुलिस के अपराध जांच निदेशक इमान इमानुद्दीन ने कहा कि लड़का खुद को अकेला महसूस करता था। उसे अपने परिवार, समाज या स्कूल में अपनी बात कहने का कोई रास्ता नहीं मिला, इसलिए उसने यह कदम उठाया।
और पुलिस जांच में क्या-क्या? : बता दें कि पुलिस जांच में सामने आया है कि छात्र ने घर पर सात छोटे बम बनाए, जिनमें से चार फट गए। इन बमों को उसने छह-वोल्ट बैटरी, प्लास्टिक कैन, रिमोट कंट्रोल और कीलों जैसी साधारण चीजों से बनाया था। पुलिस ने बताया कि उसने यह सब इंटरनेट पर देखे वीडियो और निर्देशों से सीखा।
इसके साथ ही पुलिस ने ये भी बताया कि छात्र के घर से पुलिस को एक खिलौना सब मशीन गन भी मिली, जिस पर श्वेत श्रेष्ठता से जुड़े नारे और अंतरराष्ट्रीय हिंसक चरमपंथियों के नाम लिखे थे, जिनमें कनाडा और इटली के हमलावर, न्यूजीलैंड की मस्जिद पर हमला करने वाला और कोलंबाइन स्कूल शूटिंग के हमलावर शामिल थे।
छात्र का आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं : पुलिस के अनुसार कि ये सब केवल उसकी प्रेरणा के स्रोत थे, लेकिन उसका किसी भी आतंकवादी नेटवर्क से कोई संबंध नहीं था। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला नहीं चलेगा, लेकिन उस पर पूर्व नियोजित गंभीर हमले का केस चलाया जा सकता है, जिसमें 12 साल तक की सजा हो सकती है।
96 छात्रों पर होगा सीधा असर : गौरतलब है कि इंडोनेशिया के जकार्ता में बीते हफ्ते हुए इस हमले में घायल 96 छात्रों में से आधे से ज्यादा की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। चार छात्र बहरापन का शिकार हुए हैं और 11 छात्र अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
