भारत ने ‘रेयर अर्थ मैग्नेट’ योजना के लिए दी 7,280 करोड़ की मंजूरी, वैश्विक बाजार में चीन को मिलेगी चुनौती…

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नई दिल्ली : भारत सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7,280 करोड़ की नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका मकसद है देश में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाना शुरू करना है. जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को रोजगार मिलने का काम होगा.

रेयर अर्थ मैग्नेट क्या होते हैं? : इसका मतलब है कि, वे खास प्रकार की धातु हैं जिनका घनत्व कम और चुंबकीय गुण बहुत ज्यादा होता है. इन धातुओं को मिलाकर, एक मिश्र-धातु तैयार की जाती है, जिसे बाद में मैग्नेट बनाया जाता है. जब इस मिश्र धातु को परमानेंट मैग्नेट के रूप में तैयार किया जाता है, तो यह साधारण मैग्नेट्स से कहीं ज्यादा ताकतवर और टिकाऊ होता है. इस प्रक्रिया के बाद हम इसे रेयर अर्थ मैग्नेट कहते हैं. इन मैग्नेट्स में जबरदस्त चुंबकीय शक्ति होती है, साथ ही ये छोटे और हल्के होते हैं, और इनकी चुंबकीय ताकत समय के साथ कम नहीं होती है.

यह मैग्नेट किस-किस में काम आता है? : रेयर अर्थ मैग्नेट बहुत तरह के आधुनिक उपकरणों और मशीनों जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइब्रिड कारों के मोटर, पवन चक्किया(विंड टरबाइन), कंप्यूटर हार्ड-डिस्क, स्पीकर, हेडफोन, माइक्रोफोन, मेडिकल मशीन (जैसे MRI),इंडस्ट्रियल मशीनरी, जटिल यंत्र, रडार, डिफेंस उपकरण में काम आते हैं. ऐसे में जब इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी की मांग बढ़ रही है, तो इन मैग्नेट्स की जरूरत भी बढ़ रही है. जिसके वजह से भारत सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया है.

अब तक भारत कैसे काम चलता था? : भारत में अभी तक ज्यादातर रेयर अर्थ मैग्नेट इम्पोर्ट के जरिए आते थे. मार्च 2025 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में भारत ने भारी मात्रा में कई हजार टन मैग्नेट आयात किए थे. पुरानी दुनिया में, इन मैग्नेट्स के लिए जरूरी धातु अकेले चीन या कुछ देशों के पास ज्यादा पाई जाती थीं. इसी वजह से चीन को वैश्विक बाजार पर बड़ा वर्चस्व मिला हुआ था. इस पर 2025 में चीन ने कई रेयर अर्थ और मैग्नेट्स के निर्यात पर पाबंदी लगाई जिससे सप्लाई मुश्किल हो गई और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को काफी ज्यादा असर हुआ था.

भारत की नई योजना क्या कहती है? : इसलिए सरकार ने फैसला किया कि अब भारत खुद रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन शुरू करेगा. अपनी योजना में सरकार ने  एकीकृत फैक्ट्रियां  बनाने का प्लान किया है, जहां ऑक्साइड को धातु में, धातु को मिश्र धातु में, मिश्र धातु को मैग्नेट में बदलने की प्रक्रिया की जाएगी.  इन कंपनियों का लक्ष्य है कि एक साल में लगभग 6,000 मीट्रिक टन मैग्नेट का उत्पादन किया जाए. इस योजना से देश की आयात निर्भरता खत्म होगी, आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और हमारी सुरक्षा-क्षमता मजबूत होगी.

इस कदम से देश को क्या फायदा हो सकता है? : अगर बात करें कि इस प्लान से देश को क्या फायदा होगा तो सबसे पहले इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें कम होंगी, क्योंकि जरूरी मैग्नेट्स अब आयात नहीं होगे नहीं होंगे बल्कि अपने देश में ही मिल जाएंगे. साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी और पवन ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि पवन टरबाइन आदि में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट्स देश में ही उपलब्ध रहेंगे. साथ ही रक्षा और रक्षा-उद्योग मजबूत होगा. क्योंकि मिसाइल, रडार, एडवांस हथियारों में स्थायी मैग्नेट्स की जरूरत होती है. साथ ही आत्मनिर्भर भारत बनेगा क्योंकि अब भारत सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, निर्माता बन देश में नए उद्योग और रोजगार देने का काम करेगा.

क्या चुनौती भी है? :  रेयर अर्थ तत्वों को निकालना बेहद कठिन काम होता है क्योंकि इसको साफ करना और मैग्नेट में बदलना आसान नहीं होता है. इसके लिए खनन, रिफाइनिंग, मिश्र धातु बनाना, और फिर मैग्नेट तैयार करना होता है. हर चरण में काम सटीक और कड़ा होता है. लेकिन अगर इस प्रक्रिया में सफल रहे, तो भारत तकनीकी भविष्य की दिशा में बड़ा कदम रखेगा.

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