नई दिल्ली/कोलंबो : चक्रवाती तूफान दित्वाह से हुई तबाही के कारण पिछले तीन दिनों से कोलंबो हवाईअड्डे पर फंसे 323 भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। इस चक्रवात से श्रीलंका में मरने वालों की संख्या 334 हो गई है, जबकि 370 लोग लापता हैं। लगभग 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और दो लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि रविवार को भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से सी-130 परिवहन विमान से 76 भारतीयों को हिंडन भेजा गया। वहीं, 247 भारतीयों को आईएल 76 विमान से केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम भेजा गया। उच्चायोग ने आगे कहा, बाकी फंसे हुए लोगों को भी वाणिज्यिक उड़ानों से निकाला जा रहा है। इनमें से ज्यादातर सैलानी है जो दित्वाह के कारण व्यापक बाढ़, सेवाओं में व्यवधान और उड़ानें रद्द होने से फंस गए थे। भारतीय वायुसेना के जिन दोनों विमानों से भारतीयों को वापास लाया गया वह आपदा प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री और एनडीआरएफ के जवानों को लेकर शनिवार की देर रात भारत से कोलंबो पहुंचे थे। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त डॉ. संजय पांडे ने शनिवार को हवाईअड्डे पर भारतीय नागरिकों से मुलाकात की थी और उनके लिए खाने-पीने की चीजें मुहैया कराई थी।
दित्वाह से श्रीलंका में भारी तबाही : श्रीलंका ने चक्रवात दित्वाह के कारण व्यापक तबाही और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को देखते हुए पहले ही आपातकाल की घोषणा कर दी है। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दित्वाह के कारण पूरे देश में तबाही हुई है और हर हिस्से में जान-माल का नुकसान हुआ है। भारी बारिश, बाढ़ और आंधी-तूफान से हजारों घर ढह गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। बेघर हुए लोगों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में 1,275 राहत शिविर बनाए गए हैं।
ऑपरेशन सागर बंधु के तहत मदद जारी : ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत से गए ए़नडीआरएफ और वायु सेना के जवान राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। विशाखापट्टनम से और राहत सामग्री लेकर आईएनएस सुकन्या श्रीलंका पहुंची है। श्रीलंका के 24,000 से ज्यादा पुलिस, सेना और वायुसेना के जवान अभी भी बाढ़ में फंसे परिवारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दित्वाह से बुरी तरह प्रभावित कोलंबो में ही दर्जनों परिवारों के बाढ़ के पानी में डूबे घरों में फंसे होने की आशंका है। बाढ़ के पानी के अगले तीन दिनों में कम होने की संभावना है। चक्रवात के कारण ठप हुई बिजली, पानी और संचार व्यवस्था को भी धीरे-धीरे पटरी पर लाया जा रहा है।
इंडोनेशिया, मलेशिया में भी तबाही : दित्वाह के कारण इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड में भी भारी तबाही हुई है। चक्रवाती तूफान की वजह से हुई मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ और भूस्खलन से इन तीनों देशों में 600 से अधिक लोगों की मौत हुई है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
