भाजपा : राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन या नितिन नबीन, इंटरनेट पर किए जा रहे हैं सर्च 

नई दिल्ली/पटना : भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन को बनाया गया है या नितिन नबीन को? वह किस जाति के हैं? कहां तक पढ़े हैं? अगर उन्हें बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जाता है तो क्या वह बिहार सरकार के मंत्री बने रह सकेंगे? उनका पारिवारिक भविष्य क्या है? ऐसे सवाल अचानक पूरे भारत के भाजपाई जानना चाह रहे हैं। आम आदमी भी। इंटरनेट के अलग-अलग सर्च इंजन पर इससे मिले-जुले सवाल पूछे जा रहे या सर्च किए जा रहे हैं।

नितिन नवीन या नितिन नबीन नाम है? : भाजपा के दिग्गज दिवंगत नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं नितिन। चुनाव आयोग के शपथ पत्र में भी वह अपना नाम हिंदी में नितिन नवीन लिखते हैं। हस्ताक्षर में भी स्पष्ट तौर पर हिंदी का ही नाम नितिन नवीन दिखता है। अंग्रेजी में हर जगह Nitin Nabin लिखा गया है। हर सोशल मीडिया खाते से लेकर ईमेल आईडी तक में यही लिखा है। इसलिए, अंग्रेजी में नितिन नबीन और हिंदी में वह नितिन नवीन हैं। पिता के नाम के हिसाब से उन्हें नितिन नवीन ही कहा जाता है। उनके पिता को लोग नबीन बाबू कहते थे, इसलिए नितिन को भी कई लोग नितिन नबीन कह देते हैं, हालांकि उनका नाम नितिन नवीन ही प्रचलित है।

कितने पढ़े-लिखे हैं नितिन नवीन? : भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन 12वीं तक पढ़े हैं। शुरुआती पढ़ाई बिहार के सबसे प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल- संत माइकल हाई स्कूल से हुई थी। यहीं से 1996 में 10वीं की सीबीएसई परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली में 12वीं करने गए। 1998 में 12वीं करने के बाद वह मूल धारा की स्नातक से अलग पढ़ाई करने के लिए प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे थे। 2005 में पिता नवीन किशोर सिन्हा भाजपा विधायक के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के उप मुख्यमंत्री नहीं तो मंत्री जरूर बनते, लेकिन इससे पहले दिल्ली से उनकी मौत की खबर आई। इससे नितिन की पढ़ाई-तैयारी जहां की तहां रह गई। अगले साल उनकी सीट पर उप चुनाव हुआ तो नितिन विधायक बने। मतलब, अंतिम पढ़ाई 12वीं ही रह गई।

किस जाति के हैं नितिन नवीन? : भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन कायस्थ जाति के हैं। बिहार में यह जाति सवर्ण श्रेणी में है। बिहार की जातीय जनगणना में इस जाति का प्रतिशत महज 0.6 बताया गया। इसके बाद से माना जा रहा था कि भाजपा सिर्फ नितिन नवीन के अलावा शायद किसी को विधायकी के चुनाव में नहीं उतारे। यही हुआ भी। पटना की कुम्हरार सीट कायस्थ से छीन ली गई। नितिन के पिता का नाम नवीन किशोर सिन्हा था। सिन्हा टाइटल दस्तावेजों में कायस्थों का है, लेकिन बिहार में पहले भूमिहार और फिर कुर्मी-कोइरी भी लगाने लगे। कुछ राजपूत भी यह टाइटल अब लगाते हैं। इसलिए, नितिन नवीन की जाति को लेकर लोग जानना चाहते हैं।

पत्नी क्या करती हैं, परिवार में और कौन? : नवीन किशोर सिन्हा और उनकी पत्नी मीरा सिन्हा के इकलौते पुत्र हैं नितिन नवीन। पहले पिता और फिर माता का निधन हो चुका है। मीरा सिन्हा का मानना था कि बेटा राजनीति में रहेगा तो उसका भविष्य कभी सुनिश्चित नहीं रहेगा, इसलिए वह बेटे के लिए कामकाजी बहू चाहती थीं। वह कायस्थ जाति से ही बहू लाना चाहती थीं और कामकाजी भी। दीपमाला श्रीवास्तव से नितिन नवीन की शादी उनकी पसंद से ही हुई। दीपमाना बैंक अधिकारी थीं। अब वह नौकरी छोड़ अपना स्टार्टअप नविरा इंटरप्राइजेज को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी हैं। नविरा इनकी बेटी का नाम है। नवीन-नितिन के बाद अगली पीढ़ी में एक लड़का है- नैतिक। इसके बाद हैं नित्या नविरा। यही छोटा-सा परिवार है नितिन का अब। नवीन किशोर सिन्हा पहले पीरमुहानी-लाेहानीपुर के इलाके में रहते थे। फिर विधायक आवास मिलने के बाद से लंबे समय तक मिलर स्कूल के आसपास का आशियाना रहा। अब नितिन का पता हवाई अड्डा थाना क्षेत्र का टेलर रोड स्थित सरकारी आवास है।

अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो मंत्री पद का क्या होगा? : नितिन अभी कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की कितनी संभावना है, यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। हां, अगर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति के तहत बिहार सरकार का मंत्री पद छोड़ना होगा। जेपी नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए लंबे समय से केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं, जिस पर लगातार सवाल उठ रहा है। बिहार में दिलीप जायसवाल मंत्री थे तो उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने पर सरकार की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। इस बार फिर वह प्रदेश अध्यक्ष रहते मंत्री बने हैं तो उनकी जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना तय है। इसी तरह नितिन नवीन अगर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित हो जाते हैं तो उन्हें कभी भी नीतीश कुमार सरकार के मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

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