नई दिल्ली : साल 2025 में लागू हुए चार नए श्रम कानून के विरोध में ट्रेड यूनियन प्रदर्शन करेगी। उनका आरोप है कि यह नए कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं साथ ही कंपनी को कर्मचारियों को निकालने की खुली छूट देते हैं। आज हड़ताल पर देश के 30 करोड़ श्रमिक, बैंकों और परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना
हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, राज्य परिवहन सेवाओं, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, औद्योगिक और विनिर्माण केंद्रों और विरोध क्षेत्रों में एमजीएनआरईजीए के तहत ग्रामीण रोजगार परियोजनाओं में कामकाज बाधित होने की आशंका है।
बंद का असर ओडिशा और असम जैसे राज्यों में ज्यादा असर दिखेगा, जहां पूरी तरह से कामकाज ठप हो सकता है। पंजाब सहित अन्य राज्यों में भी भारी जनभागीदारी की उम्मीद है, जहां आम आदमी पार्टी जैसी राजनीतिक पार्टियां बंद का समर्थन कर रही हैं।
इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), कृषि श्रमिक संघों, छात्रों, युवा संघों और अन्य संगठनों का समर्थन प्राप्त है। किसान समूहों ने एमजीएनआरईजीए को बहाल करने और कृषि को प्रभावित करने वाली नीतियों का विरोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भारत बंद उन नीतियों के विरोध में बुलाया गया है जिन्हें श्रमिक संघ “श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और निगम समर्थक” नीतियां बताते हैं। इनमें चार श्रम संहिताएं, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025, वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025 और हालिया मुक्त व्यापार समझौते जैसे विशिष्ट मुद्दे शामिल हैं।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) ने दावा किया है कि इस हड़ताल में लगभग 30 करोड़ श्रमिकों के हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जो पिछले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी से कहीं अधिक है।