दादा के सिर पर सरकार ने रखा था 5 लाख का इनाम, पोती आकांक्षा ने UPSC परीक्षा में रचा इतिहास

Delhi-UPSC

नई दिल्ली : रणवीर सेना बनाने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया उर्फ बरमेश्वर नाथ सिंह। जिन्हें लोग ‘मुखिया’ भी कहते थे। आज उनकी पोती ने कमाल कर दिया है। जिस ब्रह्मेश्वर के सिर पर सरकार ने 5 लाख का इनाम रखा था, जिन्हें बरसों जेल में काटने पड़े थे, आज उनकी पोती आकांक्षा सिंह ने UPSC Final Result में 301वां रैंक हासिल कर लिया है। आकांक्षा आरा जिले के पवना थाने के खोपिरा गांव की रहने वाली है।

आकांक्षा के दादा वही शख्स हैं जिन्होंने खुद की रणवीर सेना बना ली थी। इस निजी सेना को बिहार की जातिगत लड़ाई में अहम माना जाता है। नक्सली संगठनों से निजी सेना की कई मुठभेड़ हुई। इन्हीं लड़ाइयों के चलते ब्रह्मेश्वर लंबे समय तक जेल में रहे। रणवीर सेना और भाकपा माले की लड़ाई में खोपिरा गांव की धरती कई बार खून से लाल हुई। साल 2011 में जेल से रिहा हुए, लेकिन अगले ही साल उन्हें गोलियों से भून दिया गया। आकांक्षा इन्हीं मुखिया जी की पोती और इंदुभूषण सिंह की बेटी है।

आकांक्षा दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर गई। शुरुआती शिक्षा आरा के कैथोलीक हाई स्कूल से शुरू हुई, जहां आकांक्षा ने 2017 की वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में 80% मार्क्स लाकर मैट्रिक की परीक्षा पास की। वही इंटरमीडिएट की परीक्षा आकांक्षा ने 2019 में कैथोलिक मिशन स्कूल से ही पास किया। इसमें उन्होंने 81% मार्क्स हासिल किए। 

इसके बाद आरा के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई हर प्रसाद दास जैन महाविद्यालय से इंग्लिश प्रतिष्ठा की परीक्षा में 2023 में परीक्षा पास की और 2022 से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। मेरे बाबा का सपना था कि मैं यूपीएससी करूं। वो मुझ पर काफी गर्व महसूस करते थे। उन्हें यकीन था कि मैं कर लूंगी। आज उनका सपना पूरा हो गया है।

विराट कोहली को अपना आदर्श मानने वाली आकांक्षा बताती हैं कि शुरू से ही उनका सपना यूपीएससी की परीक्षा क्रैक करने का था और विराट कोहली उसके रोल मॉडल हैं क्योंकि वो अपने काम के प्रति समर्पित है। वही उनके दादा स्वर्गीय बरमेश्वर नाथ सिंह उर्फ मुखिया जी की भी यही इच्छा थी कि उनके परिवार में कोई यूपीएससी की परीक्षा जरूर पास करें। इसके बाद उसने तैयारी शुरू कर दी। पहले अटेम्प्ट में प्रिलिम्स की परीक्षा वह पास नहीं कर पाई लेकिन दूसरे प्रयास में उसने 301वां रैंक हासिल किया।

अपने पिता मां के सपने को साकार कर दिया बेटी के परीक्षा को पास करने के बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल कायम है। सभी लोग बेटी कोई मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं क्योंकि बिटिया ने वह कर दिखाया है जिसका सपना हर मां-बाप को होता है। हर रोज 8 से 10 घंटे की पढ़ाई करने वाली आकांक्षा अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों एवं माता-पिता को देती है। माता रिंकू सिंह बेटी के इस सफलता पर काफी खुश हैं और उनकी आंखों से गिर रहे आंसू इस बात की गवाही देने के लिए काफी है की बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया। उसको पढ़ाई पर ज्यादा समय देने की खातिर मां ने सारा काम का बोझ अपने सर पर उठा लिया।

ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने पोते-पोतियों और भतीजों को पढ़ाने के लिए ही गांव से आरा शिफ्ट होने का निर्णय लिया था। सबसे पहले महाराजा हाता में किराए के मकान में रहने लगे। फिर वहां से मौलाबाग गये और डॉक्टर सोमेश्वर दत्त शास्त्रीजी के किरायेदार बने। उसके बाद पकड़ी वाले एक घर में जो तब तालाब के बीच था, रहना शुरू किया और आखिर में कतिरा वाले पंडित जी के मकान में शिफ्ट हुए। पकड़ी वाले घर में रहते हुए ही किसान संगठन की गतिविधियां शुरु हुई थी और कतीरा आ गये क्योंकि यहीं ऑफिस था।

वे खुद भी पढ़ने में बहुत तेज थे। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में खुद मैथ में 100 में 100 अंक प्राप्त किए थे। उनकी पोती ने भी मैट्रिक की परीक्षा में मैथ में 100 में 100 अंक प्राप्त किए। हालांकि बधाई की पात्र तो आकांक्षा की मां रिंकू सिंह भी हैं। उन्होंने जन्म से केवल दुख और संघर्ष ही देखा-झेला है। छोटी थी तो पिता उमा सिंह एकवारी की नक्सलियों ने हत्या कर दी। जब मुखिया जी अपने घर बहू बनाकर लाए तो थोड़े दिन बाद ही उनका भूमिगत जीवन, जेल के जीवन में बदल गया। जब बाहर आए तो उनकी हत्या हो गयी। उनके सीने में 5 गोलियां दागी गई थीं। पहली बार उस महिला के जीवन में खुशी का बढ़िया मौका आया है और आज बेटी की इस सफलता पर मां काफी खुश नजर आ रही है

बिहार में नक्सलियों के बढ़ते आतंक का मुकाबला करने के लिए ब्रह्मेश्वर मुखिया ने 1994 में सवर्णों के नाम पर रणवीर सेना का गठन किया था। इस सेना ने नक्सलियों से कई खूनी जंग लड़ी। 1997 में इस निजी सेना पर 58 लोगों को मारने के भी आरोप लगे। ब्रह्मेश्वर मुखिया को तब 277 लोगों की हत्या के लिए आरोपी बनाया गया। हालांकि 22 में से 16 मामलों में वह बरी हो गए। 6 में उन्हें जमानत मिली। उन्होंने 9 साल जेल में काटे।

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