पटना : भारतीय जनता पार्टी ने जबसे सीएम के नाम पर चौंकाने वाले निर्णय लिए हैं तबसे एक नया ट्रेंड डेवलप कर गया है। पहले नेता लोग अपना नाम चलवाने के लिए आग्रह करते थे अब नेता अपना नाम न चलवाने का आग्रह करते हैं।
वजह साफ है कि जिन नामों की चर्चा मीडिया में होते हैं उसे मीडिया फ्रेंडली मान कर लिया जाता है। बीजेपी के रणनीतिकारों में चर्चित नेताओं का चुने जाने का उदाहरण न के बराबर हैं पर चौंकाने वाले नाम को ले कर दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत और भी कई राज्यों के सीएम नाम उदाहरण से पटे हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सीएम के नाम को लेकर लव कुश से आने वाले नेताओं में कुश के नेताओं की चर्चा है। पर सीएम के नाम पर चल रहे नमो में कुर्मी नेता कहीं न कहीं हाशिए पर चले गए हैं।
बीजेपी के भीतर सी एम के रेस में कोई पहला नाम है तो वह है कुश जाति से आने वाले उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का। कहा जा रहा है कि सम्राट चौधरी का नाम उसी तरह से चल रहा है जैसे महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस का। कहा तो यह भी जा रहा है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी आशीर्वाद प्राप्त है। बावजूद कुछ मीडिया युवा नेता और पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुशवाहा का भी नाम चला रहे हैं।
बिहार में चल रहे सी एम फेस को ले कर एक चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालत को देख बीजेपी के भीतर भी कुर्मी नेतृत्व की तलाश हो रही है। इसके पीछे का तर्क यह दिया जा रहा है कि उत्तरप्रदेश में एक रणनीतिक चूक के कारण गत लोकसभा चुनाव में बीजेपी को काफी खामियाजा भुगतना पड़ा। हुआ यह कि बीजेपी के रणनीतिकारों ने उत्तरप्रदेश में कुर्मी नेताओं के प्रोजेक्शन में वह अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जो देना चाहिए।
इसका परिणाम बहुत ही खराब हुआ। उत्तरप्रदेश लोकसभा चुनाव का जब परिणाम आया तो कुर्मी जाति से सबसे ज्यादा सांसद समाजवादी पार्टी से जीत कर आए।
लोकसभा के परिणाम से परेशान बीजेपी के रणनीतिकारों ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और सात बार के लोकसभा सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इनके प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे तर्क यह दिया गया कि इनका प्रभाव कुर्मी जाति वाले लगभग एक दर्जन जिले हैं। इनके आने से आगामी लोकसभा चुनाव में कुर्मी वर्चस्व वाली कुछ सीटें निकाली जा सकती है।
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के अवसान काल को देखते बीजेपी के भीतर भी कुर्मी वोट बैंक को ले कर रणनीति बनाई जा रही है। चर्चा यह भी चल रही है कि कुर्मी से सी एम बना कर इस वोट पर अपना प्रभाव कायम किया जा सकता है? इस जाति के प्रति नेगेलीजेंस का भाव से कही बिहार भाजपा का हाल यू पी वाला न हो जाए। बहरहाल, बीजेपी के भीतर कई मोर्चों पर और कई जातियों को ले कर रणनीति बनाई जाने की खबरें आ रही है। पर अंतिम मुहर लगनी शेष है।
