नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान की नौसेना भारतीय एलपीजी टैंकर के लिए संकटमोचक साबित हुई है। दरअसल, ईरानी नौसेना ने पिछले सप्ताह एक भारतीय एलपीजी टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद की। यह जानकारी जहाज पर सवार एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार पत्र ब्लूमबर्ग को दी। इस तरह की मदद से भारत सरकार की कूटनीति की जीत मानी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक ब्लूमबर्ग से नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में से एक था जिन्हें इस संवेदनशील समुद्री यात्रा को करने की अनुमति दी गई थी। अधिकारी ने यह जानकारी इसलिए दी क्योंकि चालक दल को सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार नहीं था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करते समय एलपीजी से लदे दोनों भारतीय जहाज ईरानी नौसेना के साथ रेडियो संपर्क में थे, जिसने पोत का ध्वज, मूल स्थान, गंतव्य और चालक दल की राष्ट्रीयता सहित विस्तृत जानकारी एकत्रित की, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है। चालक दल के सभी सदस्य भारतीय थे। इसके बाद पोत को एक निर्धारित मार्ग पर निर्देशित किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि तेहरान द्वारा एक कंट्रोल पासेज सिस्टम लागू की जा रही है।
ईओएस रिस्क ग्रुप के सलाहकार प्रमुख मार्टिन केली ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान चुनिंदा पोतों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिसकी जांच ईरानी जलक्षेत्र में पोतों के पारगमन के दौरान की जाती है। जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन इससे अधिकतर केवल ईरान को ही लाभ हो रहा है।
भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उत्तरी अरब सागर से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए क्षेत्र में नौसैनिक संसाधन भी तैनात किए हैं। लगभग 22 भारतीय जहाज वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और लगातार खतरों के बीच सुरक्षा अभियान जारी है।
यह घटना दर्शाती है कि संघर्ष के तीव्र होने के बावजूद कूटनीति और चुनिंदा समन्वय किस प्रकार सीमित समुद्री आवागमन को संभव बना रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी लगातार ईरान के विदेश मंत्री के संपर्क में बने हुए हैं और फंसे जहाजों को निकलवाने की कोशिश में लगे हैं।
