बांग्लादेश में रोहिंग्याओं को हथियारों की सप्लाई, अमेरिका-तुर्की से जुड़ा कनेक्शन

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ढाका : भारत के पूर्वोत्तर में बांग्लादेश और म्यांमार के बिगड़े हालात के कारण सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी इलाकों में सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है। चटगांव हिल ट्रैक्ट्स बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित 13,184 वर्ग किमी का एक पहाड़ी क्षेत्र है, जिसमें रंगामाटी, खागराछड़ी और बंदरबन जिले शामिल हैं। ये इलाके पहले से ही अस्थिर रहे हैं, लेकिन रोहिंग्या शरणार्थियों की घुसपैठ और उन्हें हथियारों से लैस करने की रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि इसका सीधा असर पूर्वोत्तर भारत की शांति और स्थिरता पर पड़ सकता है।

संडे गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रोहिंग्या सशस्त्र समूहों को हथियारों से लैस किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि इन्हें हथियार देने वाले ऐसे लोग हैं, जिनका बांग्लादेश की नई-नवेली सरकार में बहुत ज्यादा प्रभाव है। रिपोर्ट में बांग्लादेश के वर्तमान विदेश मंत्री डॉ खलीलुर रहमान का नाम लिया गया है, जो इससे पहले मोहम्मद यूनुस की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। खलीलुर रहमान एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो यूनुस सरकार में महत्वपूर्ण पद पर रहने के बावजूद तारिक रहमान के मंत्रिमंडल में मौजूद हैं। उन्हें पहले से ज्यादा शक्तिशाली मंत्रालय भी दिया गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि खलीलुर रहमान के प्रति पहले मोहम्मद यूनुस और बाद में तारिक रहमान की दरियादिली के पीछे अमेरिका के साथ उनके संबंधों का हाथ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रणनीतिक और खुफिया समुदाय के कुछ वर्गों में यह राय है कि बांग्लादेश में हुए राजनीतिक परिवर्तन में बाहरी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यवाहक सरकार की स्थापना और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई शेख हसीना सरकार को हटाने के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगी गुटों ने लगातार बड़ी भूमिका अदा की थी। रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि इस संदर्भ में, खलीलुर रहमान को अंतरिम चरण के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखा जाता है, जिसका मुख्य कारण वाशिंगटन के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे।

इस बीच खुफिय इनपुट से संकेत मिले हैं कि चटगांव क्षेत्र के हालात तेजी से बदल रहे हैं। यह इलाका पहले से ही जातीय तनाव, उग्रवादी गतिविधियों और हथियारों की तस्करी के गहरे नेटवर्क के लिए बदनाम है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि, कॉक्स बाजार-चटगांव मार्ग पर सक्रिय रोहिंग्या उग्रवादी समूहों को हथियारों की आपूर्ति किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। रोहिंग्या समूहों को हथियार सप्लाई करने का उद्देश्य म्यांमार की सेना (तातमाडॉ) और अराकान आर्मी, दोनों के खिलाफ हथियारबंद विद्रोह को तेज करना है। ऐसा माना जा रहा है कि तुर्की भी इस क्षेत्र की मुस्लिम आबादी के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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