मध्य-पूर्व में उपजे हालात से निपटने के लिए भारत की तैयारियां, PM मोदी ने विस्तार से बताया

PM-Modi-Speech

नई दिल्ली : Middle East में जारी संघर्ष को 3 हफ्ते से ज्यादा का समय हो गया है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगियों पर पड़ रहा है। भारत भी ज्यादा दिन तक इससे अछूता नहीं रह सकता। ऐसे में PM मोदी ने सोमवार को लोकसभा के जरिए सभी देशवासियों को संबोधित किया और बताया कि कोरोना काल की तरह धैर्य से इस चुनौती का भी सामना करना है। साथ ही PM मोदी ने मध्य-पूर्व में उपजे हालात से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों को भी देश के सामने रखा। जानें कि मोदी सरकार ने संकट के हालात में तेल, गैस, बिजली और किसानों के लिए क्या इंतजाम किए हैं।

PM मोदी ने कहा कि भारत में गर्मी का सीजन के शुरू होने से बिजली की डिमांड बढ़ गई है। अभी देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार है। भारत ने लगातार दूसरे साल 1 अरब टन से ज्यादा कोयले का प्रोडक्शन करके एक रिकॉर्ड बनाया है। इसके अलावा पिछले दशक में, देश ने Renewable Energy की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक बड़ा प्रश्न ये है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा। भारत के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भरे हुए हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारी ये भी कोशिश है कि खरीफ सीजन की बुआई ठीक से हो सके। सरकार ने बीते वर्षों में आपातकालीन हालात से निपटने के लिए खाद का पर्याप्त इंतजाम भी किया है।

पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। ईरान से अब तक लगभग 1 हजार भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं, जिनमें से 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं। स्थिति को देखते हुए, सीबीएसई ने खाड़ी देशों के स्कूलों में कक्षा 10 और 12 की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और छात्रों की शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

PM मोदी ने कहा कि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और कई जरूरी वस्तुएं होर्मुज स्ट्रेट से भारत आती हैं। जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद, हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित न हो। जैसा कि हम सभी जानते हैं, देश अपनी एलपीजी आवश्यकता का 60 प्रतिशत आयात करता है। आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण, सरकार ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। साथ ही, एलपीजी का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है।

प्रधानमंत्री मोदी बोले कि बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही वक्त के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। बीते 11 वर्षों में हमारी रिफाइनरी कैपेसिटी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार अलग अलग देशों के सप्लायर्स के साथ भी लगातार संपर्क में है।

PM मोदी ने बताया कि बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में एथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के विभिन्न पहलुओं और भारत की रणनीति पर बोलेंगे।

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