बिहार : नालंदा में मानव तस्करी का खुलासा, 3- 3 लाख में बिक रही थीं मासूम छात्राएं

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नालंदा : जिला पुलिस ने स्कूली छात्राओं को चमक-दमक का ख्वाब दिखाकर बहला फुसलाकर, उसके बाद राजस्थान समेत दूसरे राज्यों में बेचने वाले अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। रहुई थाना क्षेत्र से गायब दो चचेरी बहनों समेत छत्तीसगढ़ की एक किशोरी को सकुशल मुक्त कराया गया है।

इस मामले में राजस्थान, छत्तीसगढ़ और नालंदा कनेक्शन सामने आने के बाद गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रामीण इलाकों की स्कूली छात्राओं को दलालों के जरिए तीन-तीन लाख रुपये तक में बेचा जाता था।

गिरोह की महिलाएं गांव-कस्बों की स्कूली बच्चियों को बेहतर जिंदगी, चमक-दमक और नौकरी का सपना दिखाकर अपने झांसे में लेती थीं। इसके बाद उन्हें बहला-फुसलाकर घर से भगाया जाता था और फिर राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों में दलालों के हाथ बेच दिया जाता था। 

सदर डीएसपी-टू संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि 9 अप्रैल को रहुई थाना क्षेत्र के एक गांव से दो चचेरी बहनों के गायब होने की शिकायत मिली थी। शिकायत मिलते ही नूरसराय अंचल निरीक्षक के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी और मानवीय जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों किशोरियां राजस्थान के बीकानेर में हैं।

पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और बीकानेर के नया नगर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों किशोरियों को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से चितौड़गढ़ जिले के राजेश कुमार राजू और उसकी पत्नी अंजली कुमारी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दंपती ने खुलासा किया कि नूरसराय थाना क्षेत्र के बालचंद बिगहा निवासी धनवंती देवी उर्फ शोभा ने दोनों लड़कियों को तीन लाख रुपये में उनके पास बेचा था। 

इसके बाद बरामद किशोरियों और गिरफ्तार आरोपियों को नालंदा लाया गया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने राजगीर कुंड परिसर के पास छापेमारी कर धनवंती देवी को उसके सहयोगी मानपुर थाना क्षेत्र के प्रभु बिगहा निवासी पुरुषोत्तम कुमार के साथ गिरफ्तार कर लिया। इसी दौरान इनके कब्जे से छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक किशोरी को भी मुक्त कराया गया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। बरामद किशोरी के परिजनों को सूचना देने के बाद उसे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। सभी गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। छापेमारी टीम में सर्किल इंस्पेक्टर मनीष भारद्वाज, डीआईयू प्रभारी आलोक कुमार सिंह, रहुई थानाध्यक्ष ललित विजय, सिद्धार्थ आनंद, संतोष कुमार सुमन, विजय प्रकाश और मिथलेश प्रसाद समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि नालंदा में नाबालिग और स्कूल जाने वाली किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगाने वाला संगठित गिरोह सक्रिय है। कई मामलों में किशोरियां बरामद हो जाती हैं, लेकिन कई मामलों में वर्षों बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाता। चाइल्ड हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 139 लड़कियां गायब हुई थीं। 

वहीं वर्ष 2025-26 में अगस्त तक ही 131 किशोरियां लापता हो चुकी थीं। अधिकांश मामलों को प्रेम-प्रसंग मान लिया जाता है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि इनमें से कुछ मामले मानव तस्करी से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसी कई किशोरियां दोबारा घर नहीं लौट पातीं।

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