महाराष्ट्र : AI की मदद से बाघ को शराब पिलाने और हमला करने का फर्जी वीडियो, इंस्टा यूजर को नोटिस

मुंबई : एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब इसका गलत उपयोग वन्यजीवों को भी निशाना बना रहा है। नागपुर जिले की ग्रामीण पुलिस ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता को नोटिस जारी किया है, जिसने एआई की मदद से ऐसा वीडियो पोस्ट किया था जिसमें एक व्यक्ति बाघ को शराब पिलाते और थपथपाते हुए दिखाया गया था। पुलिस ने कहा कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इससे गलत संदेश फैलने के साथ ही वन्यजीव अभयारण्य की छवि को नुकसान पहुंचा।

पुलिस जांच में सामने आया कि छह सेकंड की यह क्लिप पूरी तरह से एआई द्वारा तैयार की गई थी। इस वीडियो में एक व्यक्ति नशे की हालत में सड़क पर बाघ को शराब पिलाता हुआ नजर आ रहा था। पोस्ट में झूठा दावा किया गया कि यह वीडियो नागपुर जिले के पेंच टाइगर रिजर्व का है। जब यह वीडियो वायरल हुआ तो नागपुर ग्रामीण पुलिस ने मुंबई के उस व्यक्ति को नोटिस जारी किया, जिसके इंस्टाग्राम अकाउंट से ये वीडियो अपलोड किया गया था।

पुलिस ने दी सख्त चेतावनी : नागपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक डॉ. हर्ष पोद्दार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल म्हासके ने बताया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है। इसे एआई की मदद से तैयार किया गया ताकि लोग भ्रमित हों और अभयारण्य की छवि खराब की जा सके। उन्होंने बताया कि ऐसे फेक वीडियो पर्यटकों को गलत संदेश देते हैं और वन्यजीवों के प्रति गलत धारणा बनाते हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति इस तरह के फर्जी कंटेंट को साझा करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ब्रह्मपुरी वन मंडल में बाघ के हमले का दावा झूठा निकला : ब्रह्मपुरी वन मंडल के एक विश्रामगृह में बाघ द्वारा व्यक्ति पर हमला कर उसकी मौत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। विभाग ने बताया कि 31 अक्तूबर की शाम 6:42 बजे का यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे एआई  तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।

वन विभाग ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व हाल में बढ़े मानव-पशु संघर्षों का फायदा उठाकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे फर्जी वीडियो बनाने और प्रसारित करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे इन पर विश्वास न करें और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना पुलिस या वन विभाग को दें।

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