नई दिल्ली : बांग्लादेश में उपद्रवियों और कट्टरपंथियों ने बहुसंख्यक होने का गलत फायदा उठाते हुए बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों का जीना हराम कर रखा है. यूनुस सरकार की ओर से उनकी हरकतों पर आंख मूंद लेने की वजह से उनकी गुंडागर्दी इतनी बढ़ गई है कि वे भारत के इलाकों में घुसकर हमला करने की जुर्रत करने लगे हैं.
बांग्लादेश से आए जिहादियों के एक गैंग ने बॉर्डर पार कर मेघालय से एक व्यक्ति का अपहरण करने की कोशिश की. लेकिन स्थानीय लोगों और बीएसएफ को इसकी भनक लग गई. इसके बाद तलाशी अभियान चलाकर 5 गुंडों को पकड़कर लिया, जबकि 2 अभी फरार चल रहे हैं. पकड़े गए पांचों लोगों की लोगों ने जबरदस्त पिटाई कर दी, जिसके बाद वे माफी मांगते हुए गिड़गिड़ा रहे हैं. बीएसएफ ने पकड़े गए सभी आरोपियों को पुलिस को सौंप दिया है, जिनसे आगे की पूछताछ की जा रही है.
मेघालय में पकड़े गए बांग्लादेशी डकैत : मेघालय पुलिस ने बताया कि बीएसएफ ने स्थानीय नागरिक के अपहरण की कोशिश में शामिल पांचवें बांग्लादेशी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया. वह आरोपी राज्य के दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स ज़िले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित मेघालय के एक गाँव में हुए सशस्त्र हमले में शामिल था. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पांचवें संदिग्ध की पहचान मुबारक हुसैन के रूप में हुई है. उसे मेघालय पुलिस और बीएसएफ की ओर से चिबक वन क्षेत्र में संयुक्त रूप से चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया.
दुकानदार का अपहरण कर बांग्लादेश ले जाने की कोशिश : अधिकारी ने बताया कि मुबारक हुसैन आठ से नौ हथियारबंद बांग्लादेशियों के उस गिरोह का हिस्सा था, जो 7 अगस्त की आधी रात को रोंगडांगई गाँव में घुस आया. उसने स्थानीय दुकानदार बलसरंग मारक पर हमला कर उससे नकदी और कीमती सामान लूट लिया. इसके बाद वे मारक का अपहरण कर न्यू रोंगडांगई गाँव की ओर ले गए. रास्ते में मौका मिलने पर मारक खुद को बांग्लादेशी गिरोह के चंगुल से छुड़ाने में सफल रहा और भाग निकला.
पुलिस के मुताबिक मारक ने यह बात गांव में आकर स्थानीय लोगों और बीएसएफ जवानों को बताई. इसके बाद बीएसएफ, मेघालय पुलिस और ग्रामीणों ने गिरोह का पीछा करना शुरू किया. जंगल में कॉम्बिंग के दौरान गिरोह के 4 बदमाशों को पकड़ लिया गया.
बांग्लादेश की पुलिस का सिपाही निकला सरगना : पकड़े गए बांग्लादेशी अपराधियों से बांग्लादेश पुलिस का एक पहचान पत्र, तीन मेडिकल पर्चे, तीन वायरलेस हैंडसेट, एक कुल्हाड़ी, एक कांटेदार तार कटर, स्क्रू ड्राइवर, पिस्तौल का होल्स्टर, एक छोटा चाकू, तीन सूक्ष्म विस्फोटक, तीन बटुए, चार मोबाइल फोन, स्टील की हथकड़ी, तीन सूक्ष्म विस्फोटक और बांग्लादेशी व भारतीय मुद्राएं बरामद की गईं.
जांच में पता चला कि इस गिरोह का सरगना, बांग्लादेश पुलिस का कांस्टेबल मेफुस रहमान (35) है. जब ग्रामीणों और बीएसएफ कर्मियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो झड़प में वह घायल हो गया. उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. गिरफ्तार किए गए सभी बांग्लादेशी अपराधी कोमिला, जमालपुर और नारायणगंज जिलों के निवासी हैं. मेघालय पुलिस के अधिकारी ने बताया कि बचे बांग्लादेशी हमलावरों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं. इसके लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
भारत की सीमा में कैसे घुस गए बांग्लादेशी अपराधी? : बीएसएफ के अधिकारी के मुताबिक, कठिन भूभाग, जल निकाय, जंगल और पहाड़ों सहित विभिन्न कारणों से मेघालय से लगी 443 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा का एक बड़ा हिस्सा बिना बाड़ के रह गया है. हालांकि, सीमा पार से अपराध, घुसपैठ और शत्रुतापूर्ण तत्वों की आवाजाही को रोकने के लिए कुछ हिस्सों में बाड़ लगाने का काम चल रहा है. पुलिस को संदेह है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए ऐसे ही बिना बाड़ वाले इलाकों से जल निकायों में तैरकर या भूमिगत पुलियों का उपयोग करके सीमा पार कर गए होंगे.
