नई दिल्ली : भूरे रंग का एक हिमालयन भालू सियाचिन में भारतीय सेना के एक पोस्ट के पास आता जाता रहता था. पहले वह केवल रात में दिखता था. जवानों ने उसके लिए खाना रखना शुरू किया तो कुछ समय बाद भालू को भरोसा हो गया कि ये सब दोस्त हैं. और वह दिन में भी आने लगा. एक साल का उसका बच्चा भी मां के साथ आता था. हालांकि छह महीने के बाद वह मां से अलग हो गया या शायद रास्ता भूल गया. फिर वह अकेला रहने लगा.
अब उसे सेना की चौकी के करीब आने में दिक्कत होने लगी क्योंकि डॉग उसे करीब आने नहीं देते थे. जवानों ने समझा तो डॉग को बांधकर रखना शुरू किया. तब वो भालू का बच्चा करीब आने लगा. कंपनी के नाम पर उस भालू को नाम दिया गया- ‘बहादुर’. फिर एक दिन जवानों ने चौकी से झांककर देखा तो दोस्त बहादुर संकट में था. एक टिन के कनस्तर में उसका मुंह फंस गया था. सैनिक बेचैन हो गए.
हां, कई दिनों तक बहादुर को सैनिक देख नहीं पाए थे. फिर एक दिन जवानों ने देखा कि बहादुर एक टिन के डिब्बे में फंसा है. वह कुछ भी देख नहीं पा रहा था और बर्फीली चोटी पर उस जगह घूम रहा था जहां बर्फ भारी वजन होने पर टूट सकती थी. कंपनी मुख्यालय से सेना की यह चौकी करीब एक किमी दूर थी. (एक-एक कर सारे वीडियो देखिए, अपने आप में पूरी कहानी पता चल जाएगी और सैनिकों पर गर्व होगा)
7 जवानों की टीम ने भालू को बचाने का ऑपरेशन शुरू किया. जान पर खेलकर जवानों ने दोस्त बहादुर को बचाने का फैसला किया. भालू को देखने से साफ था वह कई दिनों से कुछ खाया-पिया नहीं था. शायद तीन दिन से. वह एक ही जगह पर गोल-गोल घूम रहा था. यह जगह पहाड़ की ढलान के किनारे जमी बर्फ से लटकता आगे का हिस्सा थी. वह कठोर बर्फ होती है लेकिन ज्यादा वजन आने पर टूट भी सकती थी.
भालू की गर्दन में रस्सी बांधना था : अगर वो हिस्सा टूटता तो हिमस्खलन हो सकता था. ऐसे में भालू को जल्द से जल्द बचाना जरूरी थी. हालांकि भालू की प्रकृति ऐसी होती है कि यह सब इतना आसान नहीं था. टीम ने तय किया कि सबसे हल्के कद के जवान को भालू के पास जाकर उसकी कमर में रस्सी बांधनी होगी. हुआ भी ऐसा ही. भालू की कमर में रस्सी बांधी गई जिससे अगर बर्फ का टुकड़ा टूटे तो उसे खींचा जा सके.
जान बची तो वहीं बैठा रहा भालू : घुटनों के बल पहुंचकर उसे खींच लिया गया. भालू को सुरक्षित जगह पर लाने के बाद उसे रस्सियों से बांधकर सैनिक अपनी चौकी पर ले गए. आगे जो हुआ वीडियो में साफ दिखाई देता है. सैनिकों ने बड़ी सतर्कता के साथ टिन का डिब्बा काटा. भालू के कान और गर्दन को नुकसान न पहुंचे, इसकी पूरी कोशिश की गई. बाद में जवानों ने भालू को खाना दिया और सभी सुरक्षा सावधानियों का पालन करते हुए उसे छोड़ दिया. जब जवानों ने उसे छोड़ा, तो वह लगभग 3 घंटे तक नहीं गया. जैसे वह इसी कंपनी का हिस्सा बनकर रहना चाहता था.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो लोग जवानों को सैल्यूट करने लगे. ‘बहादुर’ नाम लेकर आज भी उस भालू को बुलाओ तो वह जवानों की चौकी के पास भागकर आ जाता है. वैसे, यह वीडियो एक साल से ज्यादा पुराना है, अब फिर से सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.
