पटना : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को बिहार राजस्व सेवा के पांच अधिकारियों के त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय संबंधित जिलाधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जिन अधिकारियों के त्यागपत्र स्वीकार किए गए हैं, उनमें तीन महिला और दो पुरुष अधिकारी शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री ने इन अधिकारियों के त्यागपत्र को उनके आवेदन की तिथि से प्रभावी मानते हुए मंजूरी दी है।
स्वीकृत त्यागपत्रों में अंशु कुमार, जो वैशाली जिले के गोरौल अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी थे, उनका त्यागपत्र 19 दिसंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। इसी तरह राजन कुमार, जो रोहतास जिले के बिक्रमगंज में राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत थे, उनका त्यागपत्र 26 जून 2025 से प्रभावी माना गया है। वहीं, महिला अधिकारियों में शिवांगी पांडेय, जो सारण जिले के परसा में राजस्व अधिकारी थीं, उनका त्यागपत्र 7 मई 2025 से प्रभावी माना गया है।
इसके अलावा, अंकिता वर्मा, जो रोहतास जिले के राजपुर की तत्कालीन अंचलाधिकारी थीं, उनका त्यागपत्र 27 अगस्त 2024 से प्रभावी माना गया है। वहीं, स्मृति कुमारी, जो हाजीपुर सदर की राजस्व अधिकारी थीं, उनका त्यागपत्र 20 अगस्त 2025 से प्रभावी मानते हुए स्वीकृत किया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार संबंधित जिलाधिकारियों की ओर से भेजी गई अनुशंसाओं और सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय के बाद संबंधित अधिकारियों की सेवा से त्यागपत्र आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, जो कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भी मंत्री हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि अंचलाधिकारियों (CO) और कर्मचारियों की हड़ताल के आगे सरकार झुकेगी नहीं। उन्हें अपने काम करने के तरीके में सुधार लाना ही होगा। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ‘लोग जो बरगलाने का खेल खेल रहे हैं CO कर्मचारियों को कि सत्ता परिवर्तन होगा, NDA में सत्ता बदलेगी। ये संभव नहीं है। 40 लाख परिमार्जन और दाखिल खारिज से संबंधित केस का समाधान करना ही होगा। ऐसे लोग सावधान हो जाएं। राजस्व भूमि सुधार विभाग बिहार के लिए अभिशाप बन चुका था। इसका ठीक होना अतिआवश्यक है। काम करने वालों को ही सम्मान मिलेगा।’
