नई दिल्ली : नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि रविवार को तीन फ्रंटलाइन युद्धपोतों एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी, सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक, और एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रे का नौसेना में शामिल होना यह दर्शाता है कि भारत की युद्धपोत-निर्माण क्षमता आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के मामले में नई गति प्राप्त कर रही है।
अपने शुरुआती संबोधन में, नौसेना प्रमुख ने कहा कि ये जहाज भारतीय नौसेना की क्षमताओं को काफी बढ़ाएंगे और देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के इसके प्रयासों को अधिक शक्तिशाली व प्रभावी बनाएंगे।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में 17 महीने पहले मुंबई में हुए पहले ट्राई-कमीशनिंग के बाद कोलकाता में यह आयोजन हुआ है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ नई गति प्राप्त कर रही है।
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) की समर्पित टीम, उद्योग भागीदारों और MSME को हार्दिक बधाई दी, जिनके सहयोग से यह सफल ट्राई-कमीशनिंग संभव हो सका।
तीनों जहाजों के कमांडिंग अधिकारियों और चालक दल को बधाई देते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि वे पूरे आत्मविश्वास, ईमानदारी और ऊर्जा के साथ इन जहाजों का संचालन करेंगे और देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने कहा कि किसी राष्ट्र की सैन्य ताकत को आत्मनिर्भर बनने की उसकी क्षमता से मापा जा सकता है और भारत अब सिर्फ एक खरीदार नहीं, बल्कि एक उत्पादक और निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश निर्माता हैं और काफी हद तक आत्मनिर्भर हैं, वे वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल भारत की ब्लू इकॉनमी और समुद्री विनिर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक मजबूत समुद्री ताकत वाले देश का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी मजबूत होता है और भारत खुद को इसके लिए तैयार कर रहा है।
उम्मीद है कि इन तीन नए पोतों के शामिल होने से देश की परिचालन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, समुद्री क्षेत्र में जागरूकता बढ़ेगी और भू-राजनीतिक खतरों के खिलाफ हमारे तटीय जल की सुरक्षा मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर गौर किया कि यह अवसर दुनिया भर में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के साथ मेल खाता है। उन्होंने बंगाल की ऐतिहासिक भूमि का दौरा करने पर खुशी व्यक्त की, जिसने भारत के बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पुनर्जागरण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सदियों से समुद्री मार्गों के माध्यम से भारत को दुनिया से जोड़ा है। उन्होंने कहा, “यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत, सुरक्षित भारत और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
पीएम मोदी ने बताया कि 21 जून को विश्व स्तर पर ‘विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने इसे एक शानदार संयोग बताया कि भारत का सबसे उन्नत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत, ‘आईएनएस संशोधक’, इसी दिन नौसेना में शामिल किया गया।
