नई दिल्ली/इस्लामाबाद : पाकिस्तान में बलूच महिलाओं के अपहरण करने के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. शनिवार को एक भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. जहां नूर बख्श नाम की महिला को केच जिले के तुरबत शहर से पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉपर्स के जवानों ने अगवा कर लिया, इसके बारे में मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने जानकारी दी है. मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि नूर को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया. इतना ही नहीं उसको गायब करने के बाद ठिकाने की जानकारी भी नहीं दी, ये अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है. नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि का हवाला देते हुए बीवीजे ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तुरंत नूर का पता बताने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है.
दो युवकों को किया अगवा : बलोच के मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान सेना की तरफ से शुक्रवार रात को की गई एक और करतूत को उजागर किया, जिसके जरिए उन्होंने बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों के बारे में बताने की कोशिश की है. इससे पहले 17 दिसंबर को ग्वादर जिले के पसनी के शादी कौर इलाके में दो भाइयों, मीर अशरफ और मीर शाहिद को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने जबरन उठा लिया था, जिनके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है. बलूच वॉयस फॉर जस्टिस ने सभी की तत्काल और सुरक्षित रिहाई की मांग भी की है. इसके लिए उन्होंने मानवाधिकार संगठनों को बलूचिस्तान में लोगों जबरन गायब किए जाने के सिलसिले को खत्म करने में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाने की अपील भी की है.
पाकिस्तानी सेना पर आरोप : पाकिस्तानी सेना की तरफ से बलूचिस्तान के हब चौकी में दारो होटल इलाके से एक और महिला हजीरा बलूच के जबरन गायब हुई है, जिसको लेकर बलूच महिला फोरम ने गहरी चिंता व्यक्त की है. बीडब्ल्यूएफ ने इसको पाचंवी घटना करार दिया है. जिसमें बलूच महिलाओं का अपहरण किया जा रहा है. उनके अनुसार यह सिलसिला अब एक प्रथा बनती जा रही है. जिसके चलते यह तेजी से बढ़ रही है. सरकार को घेरते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि ये हुक्मरानों की कोई नीति है जिससे बलूचों के घर-घर में इसकी दहशत फैले.बलूचिस्तान में महिलाओं के गायब होने का सिलसिला क्वेटा के सिविल अस्पताल से 29 मई को शुरू हुआ था, जब महजबीन बलूच को गायब कर दिया गया था. जिसके बाद 22 नवंबर के दिन हब चौकी से नसरीना बलूच और 1 दिसंबर को खुजदार से फरजाना जेहरी के अलावा 9 दिसंबर को दलबंदिन से रहीमा रहीम को भी गायब किया गया.
रिहा करने की मांग : लगातार गायब हो रही महिलाओं को लेकर बीडब्ल्यूएफ ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है. उनका मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर सरकार की चुप्पी केवल पाकिस्तान और उसकी बदनाम संस्थानों को अपनी बलूच-विरोधी महिला नीतियों को बढ़ाने के लिए उकसा रही है. उन्होंने ग्लोबल कम्युनिटी से दखल देने और बलूचिस्तान में भयानक हरकतों के लिए पाकिस्तान की जिम्मेदार सरकारी संस्थानों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है. साथ ही उन्होंने हाजिरा बलूच और गैर-कानूनी रूप से हिरासत में लिए गए सभी बलूच लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग भी की है.
